

प्राधिकरण प्राधिकरण प्राधिकरण।
सहारनपुर : विकास प्राधिकरण सहारनपुर। सरकार द्वारा बनाया गया एक ऐसा विभाग जिसका दायित्व नगर में हो रहे निर्माणों को अधिनियम 1973 के अंतर्गत आने वाले नियमो के तहत कराया जाये।
परन्तु शायद सहारनपुर विकास प्राधिकरण के अवर अभियंताओं को या तो अधिनियम 1973 की परिभाषा सही तरीके से समझ नहीं आ रही है या वो जानबूझकर इसे समझना नहीं चाह रहे हैं। जी हाँ विकास प्राधिकरण के अवर अभियंताओं द्वारा अपने दायित्व का निर्वहन इतनी ईमानदारी से किया जा रहा हैं कि शायद इस बार मुख्यमंत्री के द्वारा सहारनपुर को ही पहला स्थान घोषित कर दिया जायेगा। नियमित रूप से अवैध निर्माणों की जानकारी विभाग को खबरों के माध्यम से या अन्य माध्यमों से दी जा रही है। लेकिन विकास प्राधिकरण के अवर अभियंताओं के सिर पर जूं तक नहीं रेंग रही है। पूरे नगर का जैसे सत्यानास इस विभाग द्वारा किया जा चुका है जो आगे भी पूरी लगन के साथ जारी है। जिसका परिणाम जनता को भुगतना पड़ता है। विभाग के अवर अभियंता खूब मौज मार कर अपनी जेबे गरम कर रहे हैं। आलम यह है कि निर्माण से मोटा पैसा वसूला जाता है और नियम विरुद्ध निर्माण करा दिया जाता है। किसी भी निर्माण के आगे पार्किंग नहीं छोड़ी जा रही है। लिहाजा आम जनता कीड़ो मकोड़ो की तरह जीवन यापन करने पर विवश है। ऐसे अवैध निर्माणों की वजह से सड़को पर जाम लगता है जिसमे जनता पिसती है और अधिकारी अपने AC केबिन में बैठ कर कमाए गए धन का हिसाब लगाते हैं।
जोन 8 के कच्चा 62 फुटा रोड रजवाहा पटरी से दाएं तरफ 2 बीघा में अनधिकृत क्षेत्र में करा दिया गया अवैध निर्माण।
विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अवर अभियंता रविंद्र श्रीवास्तव एवं वर्तनाम अवर अभियंता सुधीर गुप्ता व् मेट विश्वास एवं रिजवान द्वारा पूरी तरह से सेटिंग गेटिंग करके इतने बड़े निर्माण को करा दिया गया। सूत्रों कि माने तो इतने बड़े निर्माण का न तो कोई मानचित्र पास कराया गया न ही इतनी बड़ी अवैध फक्ट्री का नोटिस तक ही काटने कि जेहमत अवर अभियंताओं द्वारा उठाई गई। क्या ऐसा निर्माण बिना किसी नफे नाजायज़ के करा दिया गया या फैक्ट्री किसी मंत्री जी कि थी जो विभाग किसी तरह कि कारवाही नहीं कर सका। विभाग के उपाध्यक्ष को भी समय समय पर ऐसी जानकारी दी जा रही है परन्तु कारवाही के नाम पर कुछ नज़र आ रहा है तो वो है सिफर। ऐसे में सरकार की छवि तो धूमिल हो ही रही है साथ में करोडो रुपयों कि राजस्व कि हानि अवर अभियंताओं द्वारा सरकार को पहुंचाई जा रही है। ऐसे कृत्यों में केवल अवर अभियंता ही अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं बल्कि कुछ दलाल भी अपनी भूमिका पूरी तरह निभा रहे हैं। जो निर्माणकर्ता एवं विभाग के बीच पूरी तरह से सेटिंग करके अवैध निर्माण को पूरा करने का काम करते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रतिदिन ऐसे अवैध कार्यो कि खबर चलने के बाद क्या अधिकारी अपनी कुर्सी छोड़ कर धरातल पर जाकर अपने दायित्व का निर्वहन करेंगे या ये सिलसिला यूँ ही जारी रहेगा।















